माँ तुम जननी हो जीवनदायनी मेरी।
बहुत कष्टों से तुमने मुझको इस संसार में लाया है,
हमारे मन को भी तुम्ही ने संवारा है।
बचपन में हमारी ऊँगली पकड़कर चलना सिखाया है,
हमें खाना खिलाया और जीवन जीने की कला सिखाया है।
कभी प्यारी सी हंसी से हमें खुश होना सिखाया है,
तो कभी अपने आसुँओं से हमें दूसरों के लिए रोना सिखाया है।
तुमने हमारे दिल की भावनाओं के साथ रिश्ता बनाया है,
और हमें दूसरों की भावनाओं को समझाया है,
माँ तुम जननी हो जीवनदायनी मेरी।
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❛करो दिलसे सजदा तो इबादत बनेगी,
मॉ बाप की सेवा अमानत बनेगी।
खुलेगा जब तुम्हारे गुनाहों का खाता,
तो मॉ बाप की सेवा जमानत बनेगी।❜
